छत्तीसगढ़बालोद

बालोद जैन संघ ने किया भावभीना बहुमान, भाव-विभोर हुई धर्मसभा

संयम की राह पर बढ़ते नवरतन कोठारी

संयम की राह पर बढ़ते नवरतन कोठारी : बालोद जैन संघ ने किया भावभीना बहुमान, भाव-विभोर हुई धर्मसभा
“हर परिवार से यदि एक आत्मा भी संयम पथ पर चले, तो समाज और राष्ट्र का आध्यात्मिक भविष्य स्वर्णिम बन सकता है”

बालोद।स्थानीय महावीर भवन में उस समय भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा, जब आगामी 4 सितंबर 2026 को बीकानेर में जैन भागवती दीक्षा ग्रहण करने जा रहे दीक्षार्थी मुमुक्षु भाई नवरतन जी कोठारी का बालोद जैन संघ द्वारा भव्य स्वागत, अभिनंदन एवं बहुमान किया गया। धर्मसभा में उपस्थित अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। संयम, त्याग और वैराग्य की इस प्रेरणादायी यात्रा ने सभी के हृदय को गहराई तक स्पर्श किया।

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धर्मसभा को संबोधित करते हुए शासन दीपिका श्री प्रमिलाश्री जी मसा ने जिनवाणी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि “जिनवाणी वह दिव्य प्रकाश है, जिसके माध्यम से जीव आत्मा और शरीर के भेद को समझता है। जिनवाणी हमें कर्मों का विज्ञान सिखाती है और जीवन को सही दिशा प्रदान करती है। यदि आगम और जिनवाणी हमारे जीवन के सच्चे साथी बन जाएं, तो जीवन स्वतः उज्ज्वल और कल्याणकारी बन जाता है।”
उन्होंने कहा कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आएं, धर्म के मार्ग से कभी विचलित नहीं होना चाहिए। धर्म ही वह शक्ति है, जो संकटों में भी मनुष्य को अडिग बनाए रखती है।
श्री अनुजाश्री जी मसा ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि परिवार के बड़े सदैव हितकारी होते हैं। उनके अनुभव और मार्गदर्शन जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। परिवार में सम्मान, संस्कार और सद्भाव बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
“अब अंतराय टूटी है, प्रभु की कृपा से संयम का मार्ग प्रशस्त हुआ” – नवरतन जी कोठारी
दीक्षार्थी मुमुक्षु भाई नवरतन जी कोठारी ने अत्यंत भावुक शब्दों में कहा कि आचार्य श्री एवं उपाध्याय प्रवर का उनके जीवन पर अपार उपकार रहा है। पिछले कई वर्षों से उन्हें चारित्र आत्माओं के सानिध्य में रहने का सौभाग्य मिला, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
उन्होंने कहा, “दुनिया में हर समस्या का समाधान भगवान और गुरु के चरणों में मिलता है। मेरा विश्वास सदैव गुरुदेव पर रहा। आज प्रभु कृपा से जीवन की अंतराय टूट गई है और आगामी 4 सितंबर 2026 को बीकानेर में मेरी भागवती दीक्षा संपन्न होने जा रही है। मैं सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से निवेदन करता हूं कि इस ऐतिहासिक अवसर पर बीकानेर पधारकर अपने आशीर्वाद प्रदान करें।”
आचार्य श्रीरामलालजी मसा की प्रेरणा से हजारों जीवन बदले
अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा ने बताया कि आचार्य श्रीरामलालजी मसा युवाचार्य बनने के पश्चात अब तक 488 वीर आत्माओं को दीक्षा दिलाकर जैन शासन की प्रभावना कर चुके हैं। केवल पिछले दो वर्षों में ही 108 दीक्षाएं संपन्न हुई हैं, जो वर्तमान युग में त्याग और तपस्या की अद्भुत मिसाल है।
उन्होंने कहा कि नवरतन जी का परिवार स्वयं संयम और धर्म साधना की प्रेरक गाथा है। उनकी माताजी पूर्व में दीक्षा ग्रहण कर चुकी हैं तथा उनके सुपुत्र वर्तमान में श्री रामचरणजी मसा के रूप में जैन शासन की सेवा और प्रभावना में निरंतर समर्पित हैं।

प्रदीप चोपड़ा का भावुक वक्तव्य
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए प्रदीप चोपड़ा ने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में जब अधिकांश लोग सुख-सुविधाओं की दौड़ में लगे हुए हैं, ऐसे समय में नवरतन जी कोठारी का संयम मार्ग पर अग्रसर होना पूरे समाज के लिए प्रेरणा का महान स्रोत है।
उन्होंने कहा, “दीक्षा केवल वस्त्र परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण का महापर्व है। नवरतन जी का यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों को धर्म, त्याग और संस्कारों की ओर प्रेरित करेगा। यदि प्रत्येक परिवार से एक सदस्य भी धर्म और संयम के मार्ग पर आगे बढ़े, तो समाज में नैतिकता, करुणा और आध्यात्मिकता का नया युग प्रारंभ हो सकता है।”

जैन समाज पदाधिकारियों ने बताया गौरव का क्षण
जैन संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि नवरतन जी कोठारी का दीक्षा निर्णय पूरे बालोद जैन समाज के लिए गर्व और गौरव का विषय है। यह केवल एक व्यक्ति की आध्यात्मिक यात्रा नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के संस्कारों, श्रद्धा और धार्मिक चेतना की विजय है।

समाजजनों ने कहा कि त्याग, तपस्या और आत्मकल्याण का यह पवित्र मार्ग आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा तथा धर्म के प्रति आस्था को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
संयम गीतों से भाव-विभोर हुआ वातावरण
प्रवचन के उपरांत बालोद जैन संघ द्वारा दीक्षार्थी भाई नवरतन जी कोठारी का स्वागत, अभिनंदन एवं बहुमान किया गया। इस अवसर पर गायक देवेंद्र भंसाली ने सुमधुर संयम गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय और भावनात्मक बना दिया। कई श्रद्धालु संयम और वैराग्य की भावनाओं से अभिभूत होकर भावुक हो उठे।त्याग, तपस्या, वैराग्य और आत्मकल्याण की यह प्रेरक गाथा केवल नवरतन जी कोठारी की नहीं, बल्कि उन सनातन आध्यात्मिक मूल्यों की है जो मानव जीवन को ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। संसार के आकर्षणों का त्याग कर संयम का मार्ग अपनाना वास्तव में साहस, श्रद्धा और आत्मबल का सर्वोच्च उदाहरण है। बालोद की इस ऐतिहासिक धर्मसभा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आत्मा का सच्चा वैभव बाहरी संपत्ति में नहीं, बल्कि त्याग, साधना और मोक्षमार्ग की ओर बढ़ते कदमों में निहित है।
कार्यक्रम एवं सभा का सफल संचालन मुकेश श्रीश्रीमाल एवं कमल पारख ने किया।
उक्त जानकारी प्रदीप चोपड़ा ने दिया

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