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बालोद शहर में चल रहे ब्याज के धंधे में युवा पीढ़ी हो रही बर्बाद

सूदखोरों के निशाने पर संभ्रांत परिवार के युवा

बालोद शहर में चल रहे ब्याज के धंधे में युवा पीढ़ी हो रही बर्बाद

(*सूदखोरों के निशाने पर संभ्रांत परिवार के युवा)*

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(मुकेश वाधवानी की रिपोर्ट)

बालोद जिला मुख्यालय में इन दिनों सूदखोरों की चर्चा का विषय बना हुआ है शहर में रुपए को ब्याज में चलाकर सूदखोर काफी तरक्की कर रहे है । और इनका शिकार संभ्रांत परिवार व बड़े राजघराने के लोग हो रहे है ।

बता दे कि शहर में सूदखोरों ने नई स्किम निकाली है पैसे वापस न देने की जैसे कि 50000 रुपये लेने पर पर डे याने रोजाना 500 रुपये ब्याज लगता है जिसकी चर्चा भी जोरो पर है । इसमें कुछ लोग जीरो से हीरो बनते नजर आ रहे है

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार कुछ समय पूर्व एक सूदखोर ने एक लाख रुपये एक प्रतिष्ठित व्यापारी के बेटे को व्याज में दिए थे जिसके एवज में लौटाने की कोई तिथि तय नही थी बस ब्याज देने की बात पर रकम ली गई थी । पैसा जब होगा तब देना सिर्फ ब्याज रोजाना 1000 रुपये देते रहना। इस बात को मंजूर करते हुए पैसे तो युवक ने ले लिए और ब्याज भी देता रहा कुछ दिन तक यह बहुत अच्छा चला लेकिन जब वह पैसे देना बंद कर दिया तो बात गाली गलौज में आ गई । यह गोरखधंधा शहर में एक बीमारी की तरह फैल चुका है यह धंधा खासकर वो लोग कर रहे है जिनके पास कोई कारोबार नही या फिर जिनके पास कारोबार था उसे बंद कर अब यह धंधा शुरू कर दिया है ।

शहर की भयावक स्थिति ऐसी हो गई है कि कुछ लोग सूदखोरों के डर से अपने घर परिवार को छोड़कर बालोद शहर से दूर रहने को मजबूर हो गए है ।
*क्या बोलते है पीड़ित*
नगर के एक युवक ने हैलो छत्तीसगढ़ से चर्चा के दौरान बताया कि मैं भी शहर के युवक से 70000…रुपये लिए थे जिसके रोजाना 700 रुपये ब्याज देता था लगभग 2 महीने ब्याज दिया चूंकि मुझे भी गलत आदते लग गई थी जिसके कारण पैसो का अहसास नही था । आखिर में ब्याज देकर थक जाने के कारण मना करने पर सूदखोर के द्वारा गाली गलौज करने लगा एवं घर मे बताने की धमकी देने लगा। जिससे मैंने डर के कारण किसी और के पास अपने घर का सामान गिरवी रख कर उसे पैसे लौटा दिए ।

देखा जाए तो अभी भी ऐसी स्थिति है कि कई लोग अपनी इज्जत और डर इन सब चीजों को सामने आने नही देते और इसी डर का फायदा उठाकर सूदखोर इनको अपना शिकार बनाते है।

मजेदार बात तो तब सामने आई जब यह पता चला कि जब ब्याज के पैसे पटाने के लिए पैसे नही होते तो वह अपने आधार कार्ड और बैंक एकाउंट के जरिये निजी कंपनियों से लोन लेते है, और जब वहां क़िस्त नही पट पाती तो तब जाकर कंपनी वाले घर पहुचंते है उसके बाद जाकर इन सब का खुलासा होता है कि हमारे घर का बेटा इतने गहरे पानी मे है । देखा जाए तो कुछ व्यापारी दुकानदार लड़को के आधार कार्ड बैंक एकाउंट के जरियों से कुछ भी फाइनेस कर देते है जब कि वह सामान उनके घर नही जाता बल्कि उन्हें 40000 के सामान के बदले 25000 दे दिया जाता है , जिससे दुकानदार को तो 15000 का फायदा होता ही है और वह फाइनेंस करने वाले को भी 40000 रुपए का ब्याज भी मिलता है। मतलब के इधर भी मलाई और उधर भी मलाई आखिर में मरता कौन है उधार लेने वाला ? जिसे 25000 हाथ मे लेकर 8 महीनों में किस्तो के जरिये 45000 हजार पटाना पड़ता है ।
आज भी अगर सही तरीके से इन सब चीज फाइनेंस करने वाले कुछ लोगो की जांच की जाए तो उनके घर में वो सामान नही मिलेगा जो वो फाइनेंस कराया गया था क्यों कि सामान के बदले तो उन्हे पैसे उपलब्ध हो चुके है ।

ऐसी स्थिति में शहर में किसी भी तरह की कार्यवाही न होना और ऐसी बाते सामने न आना एक चिंता का विषय माना जा रहा है । ??

अब खासकर बालोद शहर की स्थिति ऐसी हो गई है कि मानो लोगो मे डर का माहौल पैदा हो गया है कि कब किसका बेटा या किसका भाई इस बर्बादी की श्रेणी में आ जाए । ऐसे में इस गोरख धंधे को रोकना बहुत जरूरी हो गया है ।

कुछ प्रतिष्ठित लोगो की माने तो यह ब्याज का धंधा लोगो के लिए मजाक बनकर रह गया है ।
*शहर के एक व्यापारी ने कहा कि 1 रुपये सैकड़ा ब्याज दर पर भी व्यपारी को पैसे लेने के लिए सोचना पड़ता है लेकिन आज की युवा पीढ़ी 50 रुपये सैकड़ा ब्याज में लेने पर भी 1 बार भी नही सोचती लेकिन सबसे बड़ी तो यह कि व्यापारी को पैसे नही मिलते लेकिन उनके घर युवाओ को एक बार मे पैसे ब्याज में मिल जाते है यह बड़ा ही सोचनीय विषय है ।*
अब वो दिन दूर नही की ऐसी स्थिति बन जाएगी कि लोग पैसे के लिए रिश्ते नाते भाई चारा सब भूल कर मारपीट में उतारू हो जाएंगे ,आखिर इन सूदखोरों का इलाज कब और कैसे होगा अब देखना बाकी है ।
शहर में एक नई बात भी बात भी सामने आई है कि युवा पीढ़ी आज कल अपनी गाड़ी या सामान भी गिरवी रख कर रोजाना ब्याज देते है *जिसका खुलासा अगले अंक में अतिशीघ्र होगा* ।….

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