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मटिया के आदिवासी समाज की अनूठी पहल: स्वयं के खर्च से बना रहे सामुदायिक भवन

पूर्व जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र चंद्राकर ने किया भूमिपूजन

मटिया के आदिवासी समाज की अनूठी पहल: स्वयं के खर्च से बना रहे सामुदायिक भवन

पूर्व जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र चंद्राकर ने किया भूमिपूजन
गुरुर।बालोद जिले के गुण्डरदेही ब्लॉक अंतर्गत ग्राम मटिया (ह) में आत्मनिर्भरता और सामाजिक एकजुटता की मिसाल देखने को मिली है। यहाँ के आदिवासी समाज ने सरकारी सहायता का इंतजार करने के बजाय स्वयं के संचित कोष से सामुदायिक भवन निर्माण का कार्य प्रारंभ किया है।
इस सराहनीय पहल का भूमिपूजन पूर्व जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र चंद्राकर के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने समाज की इस पहल को स्वावलंबन का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि गाँव में आदिवासी समाज के लगभग 30 परिवार निवास करते हैं, लेकिन आज इस पवित्र कार्य और आपसी प्रेम को देखते हुए वे स्वयं को 31वें परिवार का सदस्य मानते हैं और भविष्य में हर सुख-दुख में साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर उन्होंने भवन निर्माण हेतु आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया।
अपने संबोधन में श्री चंद्राकर ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज का समग्र विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक महिलाएं निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी न निभाएं। उन्होंने महिलाओं के योगदान को विशेष रूप से सराहनीय बताया।
आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि सामाजिक कार्यक्रमों, बैठकों और मांगलिक कार्यों के लिए एक सामुदायिक भवन की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी परिवारों ने मिलकर चंदा एकत्र कर निर्माण कार्य शुरू किया।
इस पहल को गाँव के अन्य वर्गों ने भी सराहा। कार्यक्रम में आदिवासी समाज के वरिष्ठ सदस्य, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से अश्वनी कटहरे (जनपद सदस्य), दशमत महेंद्र रात्रे (सरपंच), खेमराज सिन्हा (उपसरपंच), देवशरण यादव (पूर्व सरपंच), अनिल डहरे, राकेश डहरे, शंकुन साहू (पंच), कांशी ठाकुर, दिनेश ठाकुर (अध्यक्ष, आदिवासी समाज), मेघनाथ ठाकुर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद साहू, खिलू निर्मलकर एवं वाय.के. चंद्राकर शामिल थे।

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