
बालोद…जय स्तंभ चौक से शीतला मंदिर जाने वाले मार्ग पर स्थित दूध गंगा के सामने संचारी क्लब गार्डन में बच्चों के मनोरंजन हेतु लगाए गए झूलों की स्थिति अत्यंत जर्जर और चिंताजनक बनी हुई है। कई महीनों से यह झूले टूटे-फूटे अवस्था में पड़े हैं, लेकिन अब तक इनके मरम्मत या पुनर्निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों में इस विषय को लेकर गहरी नाराजगी है। गार्डन में खेलने आने वाले छोटे-छोटे बच्चों के लिए यह टूटे झूले किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। बावजूद इसके, जिम्मेदार विभाग की उदासीनता लगातार बनी हुई है।
यह सवाल अब सीधे शासन-प्रशासन और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है कि आखिर जनसुविधाओं की देखरेख की जिम्मेदारी किसकी है? क्या नगर पालिका की यह जिम्मेदारी नहीं बनती कि सार्वजनिक स्थलों की नियमित जांच और रखरखाव सुनिश्चित करे?
*जनसेवक उमेश कुमार सेन की मांग*

जनहित में समर्पित जन सेवक उमेश कुमार सेन ने इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए कहा कि—
“यह केवल एक गार्डन का मामला नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं से जुड़ा बड़ा प्रश्न है। प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेते हुए टूटे झूलों की मरम्मत या नए झूले लगाने की व्यवस्था करनी चाहिए।”
*बड़ा सवाल*
कब तक ऐसे ही लापरवाही का शिकार होते रहेंगे आम नागरिक?
कब जागेगा प्रशासन?
और आखिर कब तय होगी जिम्मेदारी?
अब जरूरत है कि नगर पालिका और संबंधित अधिकारी इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र समाधान करें, ताकि गार्डन फिर से बच्चों के लिए सुरक्षित और आनंददायक बन सके।



