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बालोद। जिले में शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी और महत्वपूर्ण पहल सामने आई है।

बालोद में शिक्षा क्रांति की गूंज: छाया विधायक चन्द्रभान साहू की मुख्यमंत्री से बड़ी मांग — सुशासन तिहार में दल्ली राजहरा पहुंचकर करें केंद्रीय विद्यालय का भूमिपूजन, हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ा अहम मुद्दा

बालोद। जिले में शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी और महत्वपूर्ण पहल सामने आई है।

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जननायक संजारी बालोद के छाया विधायक चन्द्रभान साहू ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से सादर आग्रह करते हुए मांग की है कि “सुशासन तिहार” के दौरान वे दल्ली राजहरा का दौरा करें और बालोद जिले में प्रस्तावित केंद्रीय विद्यालय के निर्माण हेतु भूमि पूजन कर इस बहुप्रतीक्षित कार्य की शुरुआत करें। उन्होंने इसे केवल एक मांग नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा एक संवेदनशील और जरूरी मुद्दा बताया है।

चन्द्रभान साहू ने अपने वक्तव्य में कहा कि बालोद जिला लंबे समय से एक केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की प्रतीक्षा कर रहा है।

जिले के मेधावी और प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त करने के लिए आज भी दुर्ग, रायपुर जैसे बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता है।

इससे न केवल आर्थिक बोझ बढ़ता है, बल्कि विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ता है।

ऐसे में यदि बालोद जिले में ही केंद्रीय विद्यालय की स्थापना होती है, तो यह क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम साबित होगा।

उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय विद्यालय जैसी प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था के खुलने से जिले के बच्चों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।

इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी समान अवसर प्राप्त होंगे, जो उनके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

“हमारे छत्तीसगढ़िया लाइका मन” को अपने ही जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, यही हमारी प्राथमिकता है।

साहू ने यह भी कहा कि राज्य सरकार लगातार शिक्षा और विकास के क्षेत्र में सकारात्मक कदम उठा रही है, और “सुशासन तिहार” जैसे आयोजन जनता की समस्याओं के समाधान और विकास कार्यों को गति देने के लिए एक सशक्त मंच साबित हो रहे हैं।

ऐसे में मुख्यमंत्री का दल्ली राजहरा आगमन और केंद्रीय विद्यालय का भूमिपूजन इस दिशा में एक ऐतिहासिक पहल होगी, जिससे पूरे जिले में उत्साह और नई ऊर्जा का संचार होगा।

इस मांग को लेकर जिले के नागरिकों, सामाजिक संगठनों और अभिभावकों में भी व्यापक समर्थन देखने को मिल रहा है। सभी वर्गों के लोग इस पहल को बालोद के विकास के लिए बेहद आवश्यक मानते हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री इस पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए जल्द ही इसकी शुरुआत करेंगे।

यदि यह मांग पूरी होती है, तो बालोद जिले के शिक्षा क्षेत्र में एक नई क्रांति का आगाज होगा और आने वाली पीढ़ियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री के आगामी निर्णय और संभावित दौरे पर टिकी हुई हैं, जो इस ऐतिहासिक मांग को साकार रूप दे सकता है।

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