छत्तीसगढ़बालोद

एक सच्चा आदर्श ग्राम हसदा… जहां फैसले मिलकर होते हैं और दुख-सुख भी बांटते हैं

*एक सच्चा आदर्श ग्राम हसदा… जहां फैसले मिलकर होते हैं और दुख-सुख भी बांटते हैं*

*हर दिल में सहयोग, हर घर में सम्मान, साझेदारी से समृद्धि तक- हसदा गांव की कहानी*

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– ग्राम पंचायत हसदा आपसी सहमति, सहयोग और एकजुटता की मिसाल
– हसदा की खास पहचान- दुख में सहारा, सुख में साझेदारी, न्याय भी गांव में, समाधान भी गांव में

दीपक देवदास. गुरुर

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत हसदा को एक आदर्श ग्राम के रूप में देखा जाता है, जहां विकास की नींव आपसी सहमति और सहभागिता पर टिकी हुई है। इस गांव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां किसी भी निर्णय को लेने से पहले ग्राम पंचायत के सरपंच, पंच, ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष और ग्रामीणों के बीच विचार-विमर्श किया जाता है। सभी की राय लेने के बाद ही किसी योजना या कार्य को अंतिम रूप दिया जाता है। यही वजह है कि गांव में एकता और पारदर्शिता का माहौल बना हुआ है।

गांव में विकास कार्यों को लेकर ग्राम विकास समिति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। समिति न केवल योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग करती है, बल्कि आर्थिक रूप से भी पंचायत की मदद के लिए आगे आती है। जब भी ग्राम पंचायत को किसी प्रकार की वित्तीय समस्या का सामना करना पड़ता है, तो ग्रामीण और समिति मिलकर संसाधन जुटाते हैं और समस्या का समाधान करते हैं। यह सहयोगात्मक व्यवस्था गांव को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक साबित हो रही है। कोरोनाकाल के दौरान ग्राम विकास समिति और साहू समाज ने पीएम राहत कोष में राशि व चावल जमा किया था।

*गांव का कोई मामला थाने तक नहीं पहुंचा*
हसदा गांव की एक और उल्लेखनीय बात यह है कि यहां के किसी भी विवाद को कभी थाना या न्यायालय तक नहीं जाने दिया गया। गांव के जनप्रतिनिधि और ग्राम विकास समिति मिलकर आपसी सहमति से हर विवाद का समाधान निकाल लेते हैं। अगर कोई केस थाना तक पहुंच भी गया तो उसे वापस कराकर गांव में सुनते हैं और आपसी सामंजस्य से हल करते हैं। इस परंपरा ने न केवल गांव में शांति बनाए रखी है, बल्कि आपसी रिश्तों को भी मजबूत किया है।

*सामाजिक सरोकारों में गांव एक मिसाल*
सामाजिक सरोकारों में भी यह गांव एक मिसाल पेश करता है। यदि किसी परिवार में मृत्यु हो जाती है, तो पूरे गांव के लोग मिलकर उस परिवार की मदद करते हैं। हर घर से एक किलो चावल उस परिवार को दिया जाता है, जिससे कठिन समय में उन्हें सहारा मिल सके। खास बात यह है कि यह सहयोग गांव के हर परिवार के लिए हैं। इसमें किसी भी प्रकार का जाति बंधन नहीं है। दुखी परिवार चाहे वह आर्थिक रूप से सक्षम ही क्यों न हो, वहां भी मदद पहुंचती है।

*ग्राम विकास समिति ने भरा अस्पताल का बिल*
हाल ही में गांव की एक घटना ने इस एकजुटता को और भी मजबूत रूप में सामने रखा। गांव के एक व्यक्ति पंचराम की रायपुर के एक निजी अस्पताल में मृत्यु हो गई थी, और अस्पताल द्वारा एक लाख रुपये बकाया होने के कारण शव परिजनों को नहीं सौंपा जा रहा था। इसकी सूचना गांव को लगी। ऐसी स्थिति में ग्राम विकास समिति ने आगे आकर पूरा बकाया भुगतान किया और शव को परिजनों तक पहुंचाने में मदद की। गांव में उसका अंतिम संस्कार किया गया।

*जिले में हसदा आदर्श ग्राम हैः अध्यक्ष*
गांव के सुख-दुख में ग्राम विकास समिति एक अभिभावक की तरह कार्य करती है। समिति के अध्यक्ष का कहना है कि गांव में किसी प्रकार की कोई बड़ी समस्या नहीं है और सभी के सहयोग से हसदा को आदर्श ग्राम के रूप में बनाए रखा गया है। हालांकि, कुछ तथाकथित मीडिया कर्मियों द्वारा गांव की छवि को धूमिल करने और गलत खबरें फैलाने की कोशिश की गई है। जीम का उपकरण नहीं आने के कारण देरी हुआ है। गांव में जीम का समान आ गया है और काम शुरु हो गया है। मीडिया से जुड़े लोगों द्वारा गलत खबर छापने के कारण गांव की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। ग्रामीणों को पीड़ा हुई है, इसके विरोध में ग्रामीण अब जिला और जनपद पंचायत स्तर पर अपनी बात रखने की तैयारी कर रहे हैं।
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